Monday, 13 July 2015

बचपन का यौन शोषण जिन्दगीभर डराता है

हम जो कुछ भी अपने बचपन में देखते हैं, सुनते हैं, सीखते हैं या फिर सहते हैं वो जिन्दगीभर हमारे साथ रहता है. इसलिए मां-बाप कोशिश करते हैं कि बच्चे को ज्यादा से ज्यादा अच्छी आदतें सिखाएं ताकि वो आगे चलकर एक अच्छा नागरिक बने. पर कई बार ऐसा होता है कि मां-बाप या घर में बड़ों के होने के बावजूद बच्चा खुद को नेगलेक्ट महसूस करता है. कई बार स्थिति इससे भी बुरी हो जाती है. ऐसे में जरूरी है कि बच्चे पर पूरा ध्यान दिया जाए ताकि बचपन की कोई कड़वी याद उसके आने वाले भविष्य को बर्बाद न करे. कैसे बच्चे होते हैं शोषण का शिकार? इसका कोई क्राइटेरिया नहीं है. समाज के किसी भी वर्ग के बच्चे को ये झेलना पड़ सकता है. ऐसे परिवार जहां अस्थिरता होती है, अशिक्षा होती है, अकेलापन होता है, गरीबी होती है, बेरोजगारी होती है और सामाजिक बिखराव होता है, वहां इस तरह के मामले होने का अंदेशा तुलनात्मक रूप से अधिक होता है. हमारे समाज में ऐसी सोच है कि सिर्फ बच्च‍ियों के साथ ही शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक दुराचार होता है लेकिन ऐसा नहीं है. कई मामलों में लड़कों को भी शारीरिक शोषण, मानसिक आघात और भावनात्मक ठोक...

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