इस बारे में राज्य सरकार के निर्णय का विरोध करने वालों पर करारा प्रहार करते हुए शिवसेना ने कहा कि विरोध इस आशंका से किया जा रहा है कि अगर मुसलमानों ने स्वतंत्र रूप से सोचना आरंभ किया तब वोट बैंक की राजनीति पर आधारित दलों का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा.
शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा गया है, ‘‘सरकार ने अंग्रेजी, विज्ञान और गणित जैसे विषय नहीं पढ़ाने वाले मदरसों को अनौपचारिक स्कूल के रूप में मानने का फैसला किया है. इस पहल को दुर्भावना से प्रेरित या धार्मिक शिक्षा पर आघात के मकसद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. दूसरी ओर, इसे मुस्लिम बच्चों को मुख्यधारा में लाने के रूप में देखा जाना चाहिए. ’’
शिवसेना ने...
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