Friday, 17 July 2015

जिस्म की इस मंडी में 'बैल' से सस्ती हैं 'बेटियां'

क्या आप यकीन करेंगे कि आज के इस दौर में भी बैल से सस्ती कीमत बेटियों की है? क्या आप यकीन करेंगे कि आज भी बेटियां खरीदी और बेची जा रही हैं? बाकायदा दुकानों में इंसानों की मंडी लग रही है? यकीन नहीं आता तो झारखंड चले जाइए. यहां के आदिवासी इलाके में आज भी बेटियों की कीमत जानवरों से कम है. जिस्म की इस मंडी में लड़कियों की कीमत महज 500 रुपये है, जबकि बैल की कीमत तीन हजार. इन लड़कियों को यहां से खरीदकर दिल्ली जैसे महानगरों में बेचा जाता है. जी हां, देश की बेटियां बिक रही हैं. देश की 'गुड़िया' बिक रही है. देश की लाडली बिक रही है. ना सिर्फ बिक रही है बल्कि बेहिसाब बिक रही है. ये वो खौलता हुआ सच है जो आज आपको झकझोर कर रख देगा. आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएंगी, जब आप 21वीं सदी की उस मंडी को देखेंगे जहां आज भी इंसानों को गुलामों और जानवरों की तरह खरीदा और बेचा जाता है. आपको अपनी आंखों पर यकीन नहीं होगा कि कैसे बड़े-बड़े शहरों में बेटियां बिक रही हैं; और खरीदने वाले खरीद रहे हैं....

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